क्यों
क्यों थक गए तुम,
चलते चलते।
क्यों रुक गए तुम,
मंज़िल तक पहुंचने से पहले।
हुए नहीं अभी,
कांटो से भी रूबरू
और,
फूलो को देखकर ही बहकने लगे।
जाना है अभी तो,
बहुत आगे,
चलना है अभी तो,
मीलो दूर,
आया नहीं अभी तो,
पहला पड़ाव भी,
और,
अभी से तुम थकने लगे।
मिलेंगे राही और भी,
आएँगी बहारे और भी,
पर,
रुकना नहीं है तुम्हे कहीं,
चलना है अभी तो,
मीलो दूर।
मंज़िल तक पहुंचना है,
आज नहीं तो कल सही।
© विजय कुमार बोहरा

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